Breaking News
विदाई समारोह में कैंपस में बिताए व सिखाए गए पल को याद कर भावुक हुए छात्र पंकज मिश्रा बने पायनियर हिंदी दैनिक हरियाणा के राजनीतिक संपादक समापन समारोह स्थिरता के मुद्दों पर पैनल विचार-विमर्श का साक्षी बना डी.ए.वी. शताब्दी कॉलेज में अंतर जिला स्तरीय विज्ञान प्रदशर्नी का हुआ समापन डी.ए.वी. शताब्दी कॉलेज, फरीदाबाद ने अंतर जिला स्तरीय विज्ञान प्रदशर्नी का पहला दिन छात्रों व सीए-सीएस ने संघीय बजट पर की परिचर्चा, बजट को विकसोन्मुखी बताया डीएवी शताब्दी कॉलेज में कैशलेस जागरूकता वीक की शुरूआत आत्मा के शुद्धि के बिना व्यक्तित्व विकास की कल्पना बेमानी: गुरू करमा तानपाई शहर की बेटी उद्यमी दमनदीप बांगा को मिला बिमस्टेक-सार्क वूमेन फोरम में सम्मान औद्योगिक नगरी फरीदाबाद के श्रद्धालुओं ने प्रकाश पर्व पर पटनासाहिब में मत्था टेका

पैर गंवाई पर हौसला नहीं। आज हर किसी के लिए प्रकाशपुंज है किरण कनौजिया

2

फरीदाबाद: अपने पैरों पर खड़े होकर दौड़ने की जिद ने ओल्ड फरीदाबाद की रहने वाली 29 वर्षीय किरण कनौजिया को देश की पहली महिला ब्लेड रनर बना दिया। जीवन से हताश व निराश लोगों के लिए शहर की यह शख्सियत उम्मीद की किरण है। एक हादसे में घुटने से नीचे बायां पांव गंवा देने के बाद जिद व जुनून से उठ खड़ी किरण दूसरों के लिए प्रेरणा की मिसाल बन गई है। अब स्कूल व कॉलेजों सहित नामचीन कंपनियों में प्रेरक के तौर पर इसे बुलाते हैं। हैदराबाद स्थित एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करती है। हाल ही में ये फरीदाबाद आई हुई थी। एनएच तीन स्थित डीएवी शताब्दी कॉलेज से बीसीए की पढ़ाई की है।

by Saurabh Chatterjee SIA Photography Workshops- www.siaphotography.in, My FB Page - www.facebook.com/siaphotogs, Travel Blog - www.siaphotography.in/blog

by Saurabh Chatterjee SIA Photography Workshops- www.siaphotography.in, My FB Page – www.facebook.com/siaphotogs, Travel Blog – www.siaphotography.in/blog

डॉक्टरों ने कहा था यह कभी नहीं दौड़ पाएगी
अपने जन्मदिन के ठीक एक दिन पहले किरण ने एक हादसे में बायां पैर गंवा दिया था। 24 दिसंबर 2011 को किरण हैदराबाद से फरीदाबाद आ रही थी। वे दरवाजे के पास लॉयर बर्थ पर बैठी थी। पलवल के पास बदमाशों ने हाथ से बैग छिनने का प्रयास किया। वह बदमाशों से भीड़ गई। आपाधापी में ट्रैक पर गिर पड़ी। शोर मचाया तो ट्रेन रोक ट्रैक से सह यात्रियों ने उठाया। पटरी में फंसी टांग छुड़ाई। इसके बाद वापस ट्रेन में फरीदाबाद पहुंची। वहां से हॉस्पीटल ले जाया गया। डॉक्टरों ने कहा नर्व क्रैश हो गई है। टांग काटनी पड़ेगी। इसके बाद टांग काट दी गई। 6 महीने के बाद दर्द कम नहीं होने जब डॉक्टरों से मिली तो उन्होंने कहा कि तुम्हें दौड़ना थोड़े ही एक ऑपरेशन और करना होगा। यह बात सुनकर धक्का लगा। मन में ठान ली की एक दिन जरूर दौड़ कर दिखाऊंगी। आज किरण 21 किलोमीटर जिसे हॉफ मैराथन कहा जाता है। इसमें 6 बार भाग ले चुकी है। 5 से 10 किलोमीटर के मैराथन में 15 भाग हिस्सा ले चुकी है। दर्जनों संगठनों द्वारा सम्मानित की जा चुकी हैं। 2013 से विभिन्न मैराथन में दौड़ने का सिलसिला जारी है।

3

जान बची और लाखों पाए..पापा के शब्दों ने दिया संबल
किरण कहती हैं पापा भिखा कनौजिया हमेशा कहते कि जान बची और लाखों पाए। यह लाइन मुझे संबल देता। मां कुसमा प्रेरित करती। अस्पताल आते जाते समय अपने जैसे लोगों को देखती। जो मुझसे भी अधिक पीड़ादयक स्थिति में थे। इससे जीने की प्रेरणा मिलती। फिर फिल्म अभिनेत्री सुधा चंद्रन का चेहरा जेहन में आता। कैसे वे बिना पांव के धारावाहिक, फिल्मों आदि में सफलता अर्जित की। उनके व्यक्तित्व से प्रभावित हुई। हादसे के बाद जब हैदराबाद लौटी तो वहां के हॉस्पीटल आना जाना हुआ करता था। अपने जैसे कई अन्य को देखती। उसमें कुछ ऐसे थे जो रनिंग व साइकलिंग करते थे। अपने जैसों का एक ग्रुप बनाया। डॉक्टर इसके लिए प्रेरित करते। फिर एक शुरूआत हुई।

घर बैठना गंवाड़ा नहीं था
शुरूआत बड़ी तकलीफ दायक थी। जब कृत्रित पैर लगाकर अभ्यास करती तो घर्षण से चमड़े छिल जाते। यह दर्द ने आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते। कमजोरी हो ही ताकत बनाया। मेरे अंदर इतनी क्षमता है, यह मुझे बाद में पता चला। 2013 में 5 किलाेमीटर के मैराथन से सफर शुरू किया। बाद में यह 10 फिर 21 किलोमीटर हाफ मैराथन तक पहुंचा। घटना के बाद यह तय कर लिया था कि किसी भी सूरत में घर नहीं बैठना है। मौजूदा समय में भी अभ्यास जारी है। आगे आयोजित होने वाले मैराथन में भाग लेंगी। किरण हैदराबाद हाफ़ मैराथन साढ़े तीन घंटे, दिल्ली की रेस 2.58 और इस मुंबई मैराथन 2.44 मिनट में पूरी की है।

एक टांग न होने मलाल नहीं
किरण कहती हैं कि एक टांग न होने का मलाल नहीं है। कृत्रिम टांग लगने के बाद मानो फिर से बच्चा बन जाने वाली स्थिति हो गई थी। दिमाग को शुरू में पता नहीं होता था कि मेरे पास कृत्रिम टांग है। हमेशा डरती कही गिर न जाऊं। हर एक कदम रखना सिखा। आगे की तैयारी जारी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *