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अटल बिहारी वाजपेयी का राजनैतिक जीवन मे शुरुआत कैसे हुई? जाने

अटल बिहारी जी ने अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत आर्य कुमार सभा से की जो कि आर्य समाज की एक इकाई है. और बाद में सन 1944 को अटल जी इसी आर्य कुमार सभा के महासचिव चुने गए. इसी बीच 1942 में भारत छोड़ो आन्दोलन में उन्होंने बड़े बड़े नेताओं के साथ स्वतंत्रता संग्राम आन्दोलन में हिस्सा लिया और जेल भी गए. इसी आन्दोलन के दौरान अटल जी की मुलाकात जनसंघ के संस्थापक श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी से हुई. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने नेतृत्व में उन्होंने राजनीती की बारीकियां सीखी और उनके विचारों को आगे बढ़ने लगे. अटल बिहारी बाजपेयी भारतीय जन संघ के संस्थापक सदस्यों भी थे. हालाँकि पहले उन्होंने अपना करियर पत्रकारिता से शुरू किया था लेकिन 1951 में जनसंघ से जुड़ने के बाद उन्होंने पत्रकारिता छोड़ दी और राजनीति में अपना कैरियर बनाया. श्री मुखर्जी जी की मृत्यु के पश्चात भारतीय जनसंघ की कमान अटल जी हाथ में आ गयी.Vajpayee

अटल बिहारी बाजपेई एक बहुत ही मंझे हुए कुशल वक्ता थे और अपनी इस वाक् शक्ति के कारण राजनीति के शुरुआती दिनों में ही उन्होंने रंग जमा दिया. लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता दिन पर दिन बढ़ने लगी. सबसे पहले उन्होंने लखनऊ में हुए एक लोकसभा का उपचुनाव लड़ा था जो की वो हार गए थे.

1957 में हुए दुसरे लोकसभा चुनाव में उन्होंने विजय प्राप्त की और बलरामपुर लोकसभा सीट से MLA चुने गए. हलकी वो तीन जगह से चुनाव लड़े थे.
सन 1968 में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मृत्यु के पश्चात अटल जी को जनसंघ का राष्ट्रिय अध्यक्ष चुना गया और 1973 तक वो भारतीय जन संघ के अध्यक्ष रहे.
1977 में जनसंघ और भारतीय लोकदल के गठबधन की सरकार बनी और जनसंघ का नाम बदल कर जनता पार्टी रखा गया और उन्हें विदेश मंत्री बनाया गया.
अटल जी ने संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन में अपना भाषण हिंदी में दिया था और इसे अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण क्षण बताया.
1979 में मोरारजी देसाई ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और जनता पार्टी का विघटन हो गया.
1980 में अटल बिहारी बाजपेयी ने लालकृष्ण आडवानी और भैरो सिंह शेखावत के साथ मिल कर भारतीय जनता पार्टी बनायीं जिसे बीजेपी भी कहा जाता है.
अटल जी 1980 से 1986 तक वो भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद पर रहे.
1984 में हुआ लोकसभा चुनाव अटल बिहारी बाजपेयी के नेतृत्व में लड़ा गया था और बीजेपी को मात्र दो ही सीटे मिली थी. 1984 का पूरा चुनाव इंदिरा लहर में बह गया था. और कांग्रेस ने इस चुनाव में अभूतपूर्व 401 सीटें जीती थी.
1989 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने भारी बढ़त के साथ कुल 85 सीटें जीती और एक बार फिर राजनीति में वापसी की.

चाणक्यलाइव न्यूज़,
अंकित गौतम की रिपोर्ट

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