Breaking News
पुलवामा आतंकी हमला : फरीदाबाद में आक्रोशित लोगों ने निकाली रैली, शहीदों को दी श्रद्धांजलि केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे तारेगना-मसौढ़ी के शहीद के परिवार से मिलने के बाद अमर शहीद रतन के परिवार से मिलने कहलगांव-भागलपुर हुए रवाना पुलवामा में शहीद हुए मसौढ़ी के संजय सिन्हा के परिवार से मिले केंद्रीय राज्य मंत्री श्री अश्विनी चौबे डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय आधी रात को निकल पड़े, पटना के दो थानेदारों पर गिर गई गाज हरियाणा-महाराष्ट्र में माटी और खून का रिश्ता : देवेंद्र फडऩवीस पिता नहीं चाहते थे कि बेटा पढ़ाई करे, महज 21 की उम्र में IAS बन कर रच दिया कीर्तिमान ब्रांड बिहार : कभी बस की छत पर मोतिहारी जाते थे राकेश पांडेय, अब दुनिया को कैंसर से बचा रहे हैं 23 मार्च से भारत में ही होगा आईपीएल प्रधानमंत्री जी जो कहते हैं वह करते हैं: अश्विनी चौबे सरकार की प्राथमिकता सबका साथ सबका विकास कैट का रिजल्ट जारी, टॉप में बिहार से एक छात्र

किसानों को लेकर हुई घोषणाओं का स्वागत, मगर स्वराज इंडिया केवल कर्ज माफी के पक्ष में नहीं

नई दिल्ली, 18 दिसंबर। स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष और किसान नेता योगेन्द्र यादव ने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में हुई किसान कर्जमाफी का यह कहते हुए स्वागत किया है कि स्वराज इंडिया केवल कर्ज माफी के पक्ष में नहीं हैं, बल्कि एक स्थाई कर्ज मुक्ति की हिमायती है। इस मसले पर जय किसान आंदोलन के संयोजक अभिक साहा ने भी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि जब तक दावे अमल में न आ जाएं, तब तक किसानों को अपनी मांगों में ढील नहीं बरतनी चाहिए।
स्वराज इंडिया की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में किसान नेता योगेन्द्र यादव ने कहा, ‘मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य सरकारों द्वारा किसान कर्जमाफी की घोषणा का स्वागत है, लेकिन अभी यह कागज की घोषणा है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब और कर्नाटक का अनुभव बताता है कि कागजी घोषणा अंतिम किसान तक नहीं पहुंच पाती है। नई सरकारों का असली इम्तिहान यही होगा कि इस ऋण मुक्ति का लाभ अंतिम किसान को मिलता है या नहीं।’
किसान नेता योगेन्द्र यादव का कहना है कि हम यह आशंका किसी कल्पना पर नहीं, बल्कि ठोस आधारों पर बता रहे हैं कि घोषणाओं के बावजूद कांग्रेस—भाजपा की सरकारों ने किसानों की कर्जमाफी नहीं की। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार ने, पंजाब में कांग्रेस सरकार ने और कर्नाटक में कांग्रेस व जनता दल (सेकुलर) की सरकार ने अबतक अमल नहीं किया है।
स्वराज इंडिया का मानना है कि किसानों की ऋण मुक्ति जरूरी है, उचित है और संभव भी। लेकिन कर्जमाफी अपने आप में किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं है। ऋण मुक्ति तब ही उपयोगी हो पाएगी, जब बिना शर्त बैंक और साहूकार दोनों तरह के ऋण से किसान को मुक्ति मिले। ऋण मुक्ति के साथ—साथ किसानों की आय में वृद्धि की समुचित व्यवस्था भी हो। जब तक ऐसा नहीं होता तब तक किसान हितैषी होने के दावे करना खोखला होगा।
जय किसान आंदोलन के संयोजक अभिक साहा कहते हैं, ‘सरकारें कई बार दबाव में किसान कर्जमाफी की घोषणाएं तो कर देती हैं, पर जब कर्जमाफी का अमल शुरू होता है तो 2 रुपए 4 रुपए माफ होने लगते हैं। ऐसे में जरूरी है कि नवनिर्वाचित दोनों राज्य सरकारें पूर्व की सरकारों द्वारा किसानों की कर्जमाफी के नाम पर किए मजाक को नहीं दोहराना चाहिए।’ किसानों के सवालों को लेकर सर्वाधिक सक्रिय रहने वाली स्वराज इंडिया के उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुपम की राय में जिस तत्परता से किसानों की कर्जमाफी की घोषणाएं हो रही हैं उससे एक बात तो साफ है कि देश के अन्नदाताओं ने राजनीति में एजेंडा सेट कर दिया है। आगामी 2019 लोकसभा में सबसे प्रभावी मुद्दा किसान ही रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *